अनजान शहर की भीड़ में कभी कभी
माँ बाप का चेहरा दिख जाता है,
लगता है, देख रहे हैं की मैं ठीक हूँ या नहीं
मैं भी देख लेती हूँ की आखो में हल्का पानी है उनकी
पर कुछ कहती नहीं , ना ही वो कहते हैं
बस देखते हैं एक नज़र और भीड़ में ही कहीं गुम हो जाते हैं.
पता नहीं यह इस शहर का तरीका है अपनापन दिखने का
या मेरे माँ बाप का.
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